Thursday, March 18, 2010

कांग्रेस के लिए संसद की डगर आगे और मुश्किल


पीएम के मनाने पर नहीं मान रहे हैं भाजपा सांसद और बड़े नेता

(sansadji.com) सरकार चलाना कितना मुश्किल होताहै, इसे प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह इस समय बखूबीमहसूस ही नहीं कर रहे, भोग भी रहे हैं। परमाणु क्षतिपूर्तिविधेयक उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।पूरी पार्टी का ध्यान, महंगाई, बजट, महिला आरक्षणविधेयक, मायावती की माला से हटकर इस विधेयक पर जा टिका है। नैया की खेवनहार भाजपा के दर पर नहीं, दर-दर पर पीए दस्तक दे रहे हैं, लेकिन भाजपा अपनी अलग रणनीति के चलते कान देने को तैयार नहीं हो रही है।इस दौरान पिछले दो-तीन दिनों में प्रधानमंत्री ने भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा से फोनपर बात की। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन को भाजपा नेताओं से मिलने भेजा। बाद मेंभाजपा ने प्रस्ताव ठुकरा दिए। पीएम ने सुषमा स्वराज से फोन पर सहयोग मांगा। बात नहीं बनी। यशवंत सिन्हासे फोन पर बात की कि आपत्तियों पर चर्चा के लिए वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को उनके पास भेजना चाहते हैं।शिवशंकर मेनन ने अरुण जेटली को फोन किया। जेटली ने सुषमा स्वराज से बात की। यशवंत सिन्हा नेलालकृष्ण आडवाणी को सब बताया। सिन्हा-शौरी की राय में फर्क सामने आया। भाजपा ने तय किया सब एकसाथ संसद भवन परिसर में मेनन से मिलें। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, एस.एस. अहलूवालिया, डा. मुरलीमनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा ने एक साथ वार्ता की। मेनन ने चाहते थे कि पहले विधेयक पेश हो जाए, फिर संसदकी स्थायी समिति की बैठक में भाजपा जो कहेगी उसे उसमें शामिल कर लिया जाए, लेकिन भाजपा ने ये प्रस्तावभी ठुकरा दिया है। अभी तक बात बनी नहीं है।

1 comment:

Unknown said...

बड़े दिनों बाद तो भाजपा एक सच्चे विपक्ष की आक्रामक भूमिका में दिखाई दे रही है… बढ़िया है… सरकार को ऐसे ही रगड़ना चाहिये…।