Thursday, April 8, 2010

बसपा सांसद ने दिया चुनाव आयोग को जवाब




(sansadji.com)

बहुजन समाज पार्टी के सांसद एवं पार्टी के शीर्ष न्यायिक पैरोकार सतीशचंद मिश्रा ने आज चुनाव आयोग को जवाब सौंपने के बाद बताया कि स्वागत की मुद्रा में हाथी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है। स्वागत की मुद्रा में खड़े हाथी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और स्वागत की मुद्रा में खड़े इन हाथियों एवं पार्टी के चुनाव चिन्ह के बीच कोई समानता नहीं है। इससे पहले चुनाव आयोग के समक्ष तीन याचिकायें दाखिल की गई थीं जिनमें आरोप लगाया गया था कि मायावती सरकार ने जानबूझकर राज्य में अनेक स्मारकों पर हाथियों की प्रतिमायें स्थापित की है। अगर उसके हाथी चुनाव चिन्ह पर आपत्ति की जा रही है तब तो उस आधार पर एक राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते भाजपा को भी अपने राजनीतिक चिन्ह के रूप में कमल का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि यह सीधे उसे धार्मिक पौराणिक गाथा से जोड़ता है और स्थायी आधार पर मतदाताओं के दिलो दिमाग को प्रभावित करता है। कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए सांसद मिश्रा ने बताया है कि हाथ चुनाव चिन्ह के साथ पार्टी के नेता हाथ हिलाकर हर किसी का का अभिवादन करते हैं। सांसद मिश्रा ने बताया कि पार्टी के चुनाव चिन्ह को जब्त करने की मांग संबंधी याचिकायें विचार करने योग्य नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाये गये बिन्दु निराधार हैं। मिश्रा ने आरोप लगाया कि याचिका जनहित में नहीं है और राजनीतिक दलों द्वारा प्रेरित हैं जो बसपा के बढते कद से असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि इन याचिकाओं को रद्द कर दिया जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने पार्टी के तर्कों को सुना और इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपने अपने जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। प्रतिमाओं की स्थापना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है
क्योंकि चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की घोषणा किये जाने के बाद आचार संहिता लागू होती है और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक यह लागू रहती है। मुख्यमंत्री मायावती की प्रतिमा लगाने के बारे में सांसद मिश्रा ने कहा कि नेहरू और इंदिरा की प्रतिमाएं भी देश भर में लगाई गयी हैं। फिर मायावती की प्रतिमा लगाने में गलत क्या हो सकता है।

No comments: